साहसी और निडर कुत्ते की कहानी

साहसी और निडर कुत्ते की कहानी

यह कहानी है 'शेरा' की, जो किसी खास ब्रीड का कुत्ता नहीं था, बल्कि गांव की गलियों में पला-बढ़ा एक असली "देशी" शूरवीर था। उसका रंग गहरा भूरा था और उसकी आंखों में गजब की चमक और समझदारी थी।
चौपाल का रक्षक: शेरा
रामपुर गांव के किनारे एक पुराना बरगद का पेड़ था, जहाँ गांव के बुजुर्ग पंचायत करते थे। शेरा अक्सर वहीं किसी चबूतरे के नीचे ऊंघता रहता। लोग उसे बचा-कुचा खाना दे देते, और शेरा बदले में पूरे गांव की रखवाली अपनी जिम्मेदारी समझता था।
एक रात की बात है, पूरा गांव गहरी नींद में सोया हुआ था। सर्दियों की धुंध इतनी गहरी थी कि हाथ को हाथ सुझाई नहीं दे रहा था। अचानक, शेरा के कान खड़े हो गए। उसने हवा में कुछ सूंघा—वह गंध किसी इंसान की नहीं, बल्कि जंगली जानवर की थी।
वह भयानक रात
गांव के पास के जंगल से एक खूंखार तेंदुआ भटककर बस्ती में घुस आया था। वह चुपके से सुखदेव किसान के बाड़े की तरफ बढ़ रहा था, जहाँ गायें और छोटे बछड़े बंधे थे। तेंदुए की आहट पाकर जानवर डर के मारे रंभाने लगे, लेकिन उनकी आवाजें बंद कमरों तक नहीं पहुँच पा रही थीं।
सिर्फ शेरा सजग था। उसने एक जोरदार दहाड़ जैसी भौंक मारी और बाड़े की तरफ दौड़ पड़ा।
शेरा का साहस
आमतौर पर एक कुत्ता तेंदुए के सामने टिक नहीं पाता, लेकिन शेरा "देशी" था—निडर और वफादार। उसने यह नहीं सोचा कि वह कितना छोटा है। उसने सीधे तेंदुए के सामने खड़े होकर गुर्राना शुरू किया। तेंदुआ उस पर झपटा, शेरा फुर्ती से पीछे हटा और उसने तेंदुए के पिछले पैर पर वार किया।
शेरा के लगातार भौंकने और शोर मचाने से गांव वाले जाग गए। हाथ में लाठियां और मशालें लेकर सुखदेव और अन्य ग्रामीण बाड़े की तरफ भागे।
 * शेरा की फुर्ती: वह तेंदुए को उलझाए रखा ताकि वह बछड़ों तक न पहुँच सके।
 * ग्रामीणों की मदद: रोशनी और शोर देखकर तेंदुआ घबरा गया और जंगल की तरफ भाग निकला।
गांव का नायक
जब सब शांत हुआ, तो देखा गया कि शेरा के कंधे पर तेंदुए के पंजों के गहरे निशान थे, लेकिन उसकी पूंछ अभी भी गर्व से हिल रही थी। सुखदेव ने नम आंखों से शेरा को गले लगा लिया। उस दिन के बाद से शेरा सिर्फ एक "गली का कुत्ता" नहीं रहा, वह रामपुर का 'रक्षक' बन गया।
आज भी रामपुर के बच्चे शेरा की बहादुरी की कहानियां सुनते हैं। उसे अब घर-घर से दूध और रोटी मिलती है, और वह आज भी उसी बरगद के नीचे शान से बैठता है—गांव की सुरक्षा का जिम्मा अपनी आंखों में लिए।

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