यहाँ इस मंदिर से जुड़ी मुख्य जानकारियाँ दी गई हैं:
1. कहाँ स्थित है?
यह मंदिर लखीमपुर खीरी जिला मुख्यालय से लगभग 14 किलोमीटर दूर ओयल (Oel) नामक कस्बे में स्थित है। यह जगह लखनऊ से लखीमपुर जाने वाले रास्ते पर पड़ती है।
2. मंदिर की खासियत (अनोखी वास्तुकला)
* मेंढक की पीठ पर मंदिर: जैसा कि नाम से पता चलता है, यह पूरा मंदिर एक विशाल पत्थर के मेंढक की पीठ पर बना हुआ है। यह दुनिया के इकलौते मंदिरों में से एक है जो 'मंडूक तंत्र' (मेंढक तंत्र) पर आधारित है।
* खड़े नंदी की मूर्ति: आमतौर पर शिव मंदिरों में नंदी (बैल) की मूर्ति बैठी हुई मुद्रा में होती है, लेकिन यहाँ नंदी की मूर्ति खड़ी हुई अवस्था में है, जो इसे और भी खास बनाती है।
* रंग बदलता शिवलिंग: मंदिर के अंदर स्थापित शिवलिंग को 'नर्मदेश्वर महादेव' कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि यह शिवलिंग दिन में कई बार अपना रंग बदलता है।
3. इतिहास और निर्माण
* इस मंदिर का निर्माण करीब 200 साल पहले (19वीं सदी में) ओयल रियासत के राजा बख्त सिंह ने करवाया था।
* कहा जाता है कि उस समय यह क्षेत्र सूखे और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा था। एक तांत्रिक की सलाह पर राजा ने तंत्र विद्या के आधार पर इस मंदिर को बनवाया ताकि राज्य को आपदाओं से बचाया जा सके और सुख-समृद्धि आए।
4. धार्मिक महत्व
* यह मंदिर तंत्र साधना का एक प्रमुख केंद्र माना जाता था।
* महाशिवरात्रि और सावन के महीने में यहाँ भक्तों की भारी भीड़ होती है।
* दीपावली के समय भी यहाँ विशेष पूजा की जाती है क्योंकि तांत्रिक मान्यताओं में मेंढक को शुभ और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
संक्षेप में: अगर आप लखीमपुर खीरी जा रहे हैं, तो ओयल का यह 'मेंढक मंदिर' अपनी ऐतिहासिक और वास्तुकला की दृष्टि से देखने लायक जगह है।
क्या आप जानना चाहेंगे कि यहाँ पहुँचने का सबसे आसान रास्ता क्या है?
ओयल स्थित मेंढक मंदिर (नर्मदेश्वर महादेव मंदिर) पहुँचने के सबसे आसान रास्ते और तरीके नीचे दिए गए हैं:
1. सड़क मार्ग (सबसे सुविधाजनक)
यह मंदिर लखीमपुर-सीतापुर मार्ग पर स्थित है और सड़क मार्ग से यहाँ पहुँचना सबसे आसान है।
* लखीमपुर खीरी से: यह मंदिर जिला मुख्यालय से मात्र 14-15 किलोमीटर की दूरी पर है। आप यहाँ से ऑटो, टैक्सी या अपनी निजी कार से 20-30 मिनट में पहुँच सकते हैं।
* लखनऊ से: यदि आप लखनऊ से आ रहे हैं, तो यह दूरी लगभग 135 किलोमीटर है। आप NH-24 (सीतापुर रोड) के जरिए लगभग 3 से 4 घंटे में पहुँच सकते हैं। ओयल कस्बा मुख्य मार्ग के पास ही स्थित है।
2. रेल मार्ग
* निकटतम स्टेशन: सबसे पास का बड़ा रेलवे स्टेशन लखीमपुर (LMP) है।
* लखीमपुर स्टेशन पहुँचने के बाद, आप बाहर से ऑटो-रिक्शा या बस लेकर सीधे ओयल (मेंढक मंदिर) के लिए जा सकते हैं।
3. हवाई मार्ग
* निकटतम हवाई अड्डा: लखनऊ का अमौसी हवाई अड्डा (चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा) है।
* एयरपोर्ट से आप टैक्सी किराए पर ले सकते हैं या बस के जरिए पहले लखीमपुर और फिर ओयल पहुँच सकते हैं।
यात्रा के लिए सुझाव:
* समय: मंदिर सुबह से शाम तक खुला रहता है। कोशिश करें कि आप दिन के समय जाएँ ताकि मंदिर की वास्तुकला को अच्छी तरह देख सकें।
* लोकेशन: गूगल मैप्स पर आप "Narmadeshwar (Frog Temple), Oel" सर्च करके आसानी से पहुँच सकते हैं।
लखीमपुर खीरी और ओयल के आसपास रुकने की व्यवस्था और अन्य दर्शनीय स्थलों की जानकारी नीचे दी गई है:
1. रुकने की व्यवस्था (Where to Stay)
ओयल एक छोटा कस्बा है, इसलिए वहाँ बहुत अच्छे होटल मिलना मुश्किल हो सकता है। बेहतर होगा कि आप लखीमपुर शहर में ठहरें, जो यहाँ से मात्र 20-30 मिनट की दूरी पर है।
* लखीमपुर शहर में विकल्प: यहाँ आपको बजट से लेकर मध्यम श्रेणी के कई अच्छे होटल्स मिल जाएंगे। (जैसे: होटल लैंडमार्क, होटल रमा या अन्य स्थानीय गेस्ट हाउस)।
* सीतापुर: अगर आप लखनऊ की तरफ से आ रहे हैं, तो सीतापुर शहर में भी रुकने के अच्छे विकल्प मिल सकते हैं।
2. आसपास की अन्य दर्शनीय जगहें (Places to Visit Nearby)
अगर आप मेंढक मंदिर देखने जा रहे हैं, तो आप अपनी यात्रा में इन जगहों को भी शामिल कर सकते हैं:
* दुधवा नेशनल पार्क (Dudhwa National Park): यह लखीमपुर जिले का सबसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। अगर आपको वन्यजीव और प्रकृति पसंद है, तो यहाँ टाइगर, गैंडे और कई दुर्लभ पक्षी देखे जा सकते हैं। (यह ओयल से लगभग 100-110 किमी दूर है)।
* गोला गोकर्णनाथ (Choti Kashi): इसे 'छोटी काशी' भी कहा जाता है। यहाँ भगवान शिव का एक बहुत ही प्राचीन और भव्य मंदिर है। इसकी धार्मिक मान्यता बहुत अधिक है।
* शारदा बैराज: अगर आप शांति और नदी के किनारे का आनंद लेना चाहते हैं, तो यहाँ जा सकते हैं।
* देवकाली मंदिर: यह भी एक ऐतिहासिक मंदिर है जिसका संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है।
यात्रा के लिए कुछ सुझाव:
* भोजन: ओयल कस्बे में आपको स्थानीय ढाबे और नाश्ते की दुकानें मिलेंगी, लेकिन अच्छे रेस्टोरेंट के लिए लखीमपुर शहर वापस आना बेहतर रहेगा।
* सबसे अच्छा समय: यहाँ आने के लिए अक्टूबर से मार्च तक का समय सबसे अच्छा है, क्योंकि मौसम सुहावना रहता है।