कहानी: किताबों से कोठी तक
ये कहानी है रोहित नाम के एक लड़के की — जो एक छोटे से गाँव में मिट्टी के घर में पैदा हुआ था। पिता गांव के पोस्टमैन थे — मामूली सी तनख्वाह, घर में पाँच भाई-बहन। पढ़ाई के नाम पर गाँव का सरकारी स्कूल, टूटी बेंचें, चटाई और गर्मी में पसीने से भीगी कॉपी।
लेकिन रोहित को एक बात बचपन से पता थी — अगर गरीबी से भागना है तो पढ़ाई ही भागने की ट्रेन है।
---
📚 पहला कदम
गाँव के स्कूल में रोहित ने दिन-रात एक कर दिया। मिट्टी के घर की दीवारों पर उसने चार्ट पेपर चिपका दिए थे। रात को लालटेन की रोशनी में पढ़ता — माँ की डाँट पड़ती, “आँखें खराब हो जाएँगी बेटा!” लेकिन रोहित कहता —
“माँ, अभी आँखें खराब हुई तो चल जाएगा, लेकिन अगर पढ़ाई नहीं की तो पूरी ज़िंदगी खराब हो जाएगी!”
---
🧑🎓 गाँव से शहर
10वीं में उसने पूरे जिले में टॉप किया। गाँव के मास्टर साहब ने उसका नाम शहर के अच्छे स्कूल में लिखवा दिया। अब उसने गाँव छोड़ा, शहर का हॉस्टल पकड़ा — वहाँ उसने सैकड़ों बच्चों में सबसे पीछे बैठकर भी सबसे आगे निकलने का सपना देखा।
कॉलेज में दाख़िला लिया — किताबें इतनी महँगी कि पुराने पेपर बेचकर खरीदीं। कभी रात में ट्यूशन पढ़ाई, कभी लाइब्रेरी में रात गुजारी। दोस्तों की पार्टी छोड़ी, नए कपड़े छोड़ दिए — पर किताबों से दोस्ती नहीं छोड़ी।
---
✈️ पहली नौकरी
MBA में उसने स्कॉलरशिप से पढ़ाई की। फिर एक बड़ी कंपनी में नौकरी मिल गई। शुरुआती तनख्वाह तो मामूली थी — लेकिन वो जानता था कि अभी शुरुआत है। वो दूसरों से दोगुना काम करता। जब लोग 9 से 5 की नौकरी करते थे, वो रात के 2 बजे तक लैपटॉप पर बैठा रहता।
कंपनी के बॉस ने देखा — “ये लड़का तो सिर्फ सैलरी नहीं, दिल से काम करता है!”
धीरे-धीरे प्रमोशन हुआ। रोहित ने अपनी पहली तनख्वाह से माँ को एक नया चश्मा लाकर दिया — वही माँ जिसने कहा था आँखें खराब न हों!
---
🏢 कहानी ने मोड़ लिया
कुछ सालों बाद उसने अपनी खुद की कंपनी शुरू की — एक छोटी सी ऑफिस में। बैंक से लोन लिया, दोस्तों ने मज़ाक उड़ाया — “इतने बड़े सपने मत देख!” लेकिन रोहित ने जवाब दिया —
“जो किताबें पढ़ी हैं, उन्हीं में सीखा है — सपने छोटे नहीं, कोशिश बड़ी होनी चाहिए।”
पहली साल में नुकसान हुआ — लोग बोले बंद कर दो। पर रोहित डटा रहा। दूसरी साल में छोटा मुनाफा हुआ। तीसरी साल में कंपनी ने करोड़ों का टर्नओवर छू लिया।
आज उसी गाँव का रोहित शहर की सबसे ऊँची बिल्डिंग के टॉप फ्लोर पर बैठा है — आलीशान ऑफिस, चमचमाती कार, अपने गाँव के बच्चों के लिए स्कॉलरशिप फंड। वही दीवारों पर चार्ट पेपर चिपकाने वाला लड़का अब हज़ारों लोगों को रोज़गार दे रहा है।
---
🏆 अंत में वही सच
कभी एक पत्रकार ने पूछा — “रोहित सर, इतनी दौलत का राज़ क्या है?”
रोहित मुस्कुराया —
“राज़ बस इतना है — पढ़ाई को मैंने भगवान माना, मेहनत को पूजा। किताबों से रिश्ता तोड़ा नहीं, वो ही मुझे कोठी तक ले आईं!”
---
✨ सीख:
👉 अगर अमीर बनना है तो पढ़ाई छोड़नी नहीं, उसे पकड़कर रखना है।
👉 किताबें सबसे बड़ा निवेश हैं — जो कोई भी चुरा नहीं सकता।
👉 जितना बड़ा सपना, उतनी बड़ी मेहनत — तभी सपने हकीकत बनते हैं।
📚✨ कविता: किताब से कोठी तक ✨📚
मिट्टी के घर से निकला था, हाथ में बस किताब,
रात की लालटेन कहती थी — मेहनत मत होने दे ख़राब।
रोटी आधी खाई उसने, सपने पूरे बोए,
कदमों में कांटे चुभते थे, पर इरादे ना रोए।
कागज़, पेन, कॉपी से ही महलों की नींव पड़ी,
जिसने पढ़ाई पकड़ी थी, किस्मत उसी की गढ़ी।
ऊँची बिल्डिंग, बड़ी गाड़ी, नाम हुआ रोशन,
किताबों के पन्नों में ही छुपा था वो धन।
जो पढ़ता है, बढ़ता है — यही सच पुराना,
किस्मत किताबों में लिखी है, ये सबको समझाना!
---
👉 पढ़ो, बढ़ो — किताबों से बड़ा कोई खज़ाना नहीं! 📖✨
Tags
Success Story